गोबर की दुर्गंध बनी छात्रों की परेशानी, मध्य विद्यालय फुल्का की स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल
By Chandan Kumar
धरहरा प्रखंड के मध्य विद्यालय फुल्का में स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विद्यालय की कुछ कक्षाओं की खिड़कियों के ठीक बाहर लंबे समय से गोबर का अंबार जमा होने के कारण छात्र-छात्राओं को दुर्गंध के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, दशरथपुर–जमालपुर मुख्य मार्ग पर स्थित इस परिसर में मध्य विद्यालय, उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) संचालित हैं। विद्यालय के जिस हिस्से में गोबर जमा है, वहां की कक्षाओं की खिड़कियां सीधे उसी ओर खुलती हैं। गर्मी और उमस के साथ-साथ बरसात के मौसम में दुर्गंध और अधिक बढ़ जाती है, जिससे कक्षाओं में बैठना छात्रों और शिक्षकों के लिए चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के सामने लंबे समय से गोबर डाला जा रहा है, लेकिन इसे रोकने या हटाने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि प्रतिदिन इसी मार्ग से शिक्षा विभाग और प्रशासन के अधिकारी गुजरते हैं, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे स्वच्छ विद्यालय अभियान की जमीनी स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और विकास का केंद्र होता है। ऐसे में यदि परिसर के आसपास गंदगी और दुर्गंध का माहौल रहेगा तो इसका सीधा असर बच्चों की एकाग्रता, स्वास्थ्य और नियमित उपस्थिति पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि स्वच्छ वातावरण प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि विद्यालय के आसपास नियमित सफाई की व्यवस्था की जाए तथा भविष्य में सार्वजनिक स्थानों, विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों के पास गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने विद्यालय के सामने जमा गोबर को जल्द हटाने, परिसर के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की अपील की है। लोगों का कहना है कि स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराना केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
चन्दन कुमार कि रिपोर्ट।


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