धरहरा सीओ समेत तीन कर्मियों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर

 


धरहरा सीओ समेत तीन कर्मियों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर 

By Chandan Kumar 

भूमि विवाद से जुड़े मामले में रिश्वत मांगने, अभिलेख में अनियमितता और अभद्र व्यवहार का आरोप


मुंगेर जिले के धरहरा अंचल कार्यालय से जुड़ा एक मामला सामने आया है। लड़ैयाटांड़ निवासी उमेश यादव ने अंचल कार्यालय के तत्कालीन अंचलाधिकारी विरेंद्र कुमार, राजस्व अधिकारी शुभांशु शेखर मिश्र एवं राजस्व कर्मचारी विजय कुमार के खिलाफ मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में परिवाद दायर किया है। परिवाद में भूमि संबंधी कार्य में कथित अनियमितता, रिश्वत मांगने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं।

परिवाद के अनुसार, उमेश यादव ने वर्ष 2022 में मौजा गोरैया स्थित कृषि भूमि की खरीद की थी। इसके बाद अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमाबंदी कायम की गई तथा एलपीसी भी निर्गत किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में अपील की प्रक्रिया के दौरान उनकी जमाबंदी रद्द कर दी गई। साथ ही ऑनलाइन भूमि अभिलेख में रकबा, खाता और खेसरा का विवरण शून्य कर दिया गया।

आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ता ने परिवाद में कहा है कि भूमि से संबंधित मामले के समाधान के लिए उन्होंने अंचल कार्यालय में कई बार आवेदन दिया। उनका आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित कार्य कराने के लिए उनसे 2.50 लाख रुपये की राशि मांगी गई।

उमेश यादव का आरोप है कि राशि देने से इनकार करने के बाद कार्यालय में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कथित तौर पर धक्का-मुक्की कर बाहर निकाल दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कानूनी कार्रवाई की मांग

परिवाद में शिकायतकर्ता ने आरोपित अधिकारियों एवं कर्मचारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई की मांग की है। साथ ही न्यायालय से मामले में कानूनी कार्रवाई करने अथवा बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

मामले में न्यायालय की ओर से आगे क्या आदेश दिया जाता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल परिवाद में लगाए गए आरोप न्यायिक विचार के अधीन हैं। आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

अस्वीकरण: इस खबर में उल्लेखित आरोप शिकायतकर्ता द्वारा न्यायालय में दायर परिवाद में लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है और किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। 

By Chandan Kumar

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