अंधविश्वास से मुक्ति और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना ही मानवतावादी विश्व समाज का लक्ष्य : पूर्व आई जी किशन सहाय



अंधविश्वास से मुक्ति और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना ही मानवतावादी विश्व समाज का लक्ष्य : पूर्व आई जी किशन सहाय


संवाददाता केशव बाथम /edited by Chandan Kumar 


विजयपुर। समाज में अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव और धार्मिक कट्टरता से ऊपर उठकर वैज्ञानिक सोच, मानवता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मानवतावादी विश्व समाज का संदेश दिया जा रहा है। इस विचार को लेकर पूर्व आई जी किशन सहाय ने कहा कि समाज का प्रमुख लक्ष्य ऐसा मानवतावादी विश्व समाज बनाना होना चाहिए, जो अंधविश्वास से मुक्त, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त, जाति-पाति और नस्लभेद से मुक्त हो।



पूर्व आई जी किशन सहाय के अनुसार मानव समाज को ऐसी सोच की आवश्यकता है, जिसमें व्यक्ति की पहचान जाति, धर्म या नस्ल के आधार पर नहीं, बल्कि उसके मानवीय मूल्यों, चरित्र और कर्मों से हो। उन्होंने कहा कि साहसी, शिक्षित, स्वस्थ और उच्च नैतिक मूल्यों वाला समाज ही वास्तविक रूप से मजबूत समाज बन सकता है।

प्रदर्शित चार्ट में ‘विज्ञान तकनीकी रूपी पेड़’ के माध्यम से विज्ञान और तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों को दर्शाया गया है। वहीं इसकी जड़ों में ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ को आधार बताया गया है।



किशन सहाय ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अर्थ केवल आधुनिक उपकरणों का उपयोग करना नहीं, बल्कि हर बात को तर्क, प्रमाण और विवेक की कसौटी पर समझना भी है। उन्होंने समाज में शिक्षा और वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

किशन सहाय ने कहा कि मानवता, नैतिकता और विज्ञान को केंद्र में रखकर ही एक बेहतर समाज की कल्पना की जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जाति, नस्ल और भेदभाव की दीवारों से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता दें तथा बच्चों और युवाओं में शिक्षा, तर्कशीलता और वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर दें

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