ईंट से ईंट बजा दूंगा"... कांग्रेस विधायक की खुली धमकी से सियासत में बवाल!

 


*जिला ब्यूरो केशव बाथम को खास रिपोर्ट"


"ईंट से ईंट बजा दूंगा"... कांग्रेस विधायक की खुली धमकी से सियासत में बवाल! 




क्या जनप्रतिनिधि की भाषा ऐसी होनी चाहिए?*विधायक की धमकी पर बवाल





श्योपुर की राजनीति में अब बयान नहीं, खुली धमकियां सुनाई दे रही हैं। विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वे राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त सीताराम आदिवासी को खुलेआम चुनौती देते हुए कहते हैं— "तेरी ईंट से ईंट बजा दूंगा... जैसे आना है वैसे आ जाना... कुश्ती लड़नी है तो कुश्ती भी लड़ लेंगे... अपने गुंडे भी ले आना।" सवाल यह है कि क्या एक निर्वाचित विधायक की भाषा ऐसी होनी चाहिए? क्या राजनीतिक मतभेद इस स्तर तक पहुंचने चाहिए कि सार्वजनिक मंच से इस तरह की चुनौती दी जाए?



शबरी माता मंदिर की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में विधायक लगातार राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त सीताराम आदिवासी पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक वह उनका सम्मान करते थे, लेकिन अब उसी भाषा में जवाब देंगे।



विधायक ने अपने बयान में कहा कि शबरी माता मंदिर की जमीन की घोषणा वर्ष 2017 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के सहयोग से करवाई थी। इसके बाद उन्होंने सीताराम आदिवासी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि "जैसे आना है वैसे आ जाओ... कुश्ती लड़नी है तो कुश्ती भी लड़ लेंगे... तेरी ईंट से ईंट बजा दूंगा... तेरे जितने गुंडे हैं उन्हें भी ले आना।"




विधायक के इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से संयमित भाषा और संवैधानिक मर्यादा की अपेक्षा की जाती है। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा और चुनौती राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना सकती है।


इस पूरे विवाद पर प्रशासन भी सख्त नजर आया। तहसीलदार नरेश रायपुरिया और एसडीएम बी.एस. श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि विधायक को धरना देने की अनुमति नहीं दी गई थी। प्रशासन का कहना है कि विधायक की वैध मांगों पर कार्रवाई की जा रही है और यदि दोबारा सर्वे की आवश्यकता होगी तो वह भी नियमानुसार कराया जाएगा।



दूसरी ओर राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त सीताराम आदिवासी ने विधायक पर समाज को गुमराह करने और राजनीतिक लाभ के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने भी विधायक की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को कानून और लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।

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