चेक किसने सौंपा? आपदा राहत वितरण को लेकर प्रशासन घिरा महगामा पंचायत के जतकुटिया गांव में वज्रपात से मृत किसान के परिजनों को आपदा राहत राशि का चेक वितरण विवादों में घिर गया है। चेक वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी मुंगेर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि आपदा राहत मद से स्वीकृत चार लाख रुपये की सहायता राशि का चेक लाभुक परिवार को संबंधित सरकारी अधिकारी के बजाय एक गैर-सरकारी व्यक्ति के माध्यम से दिलाया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। अजय कुमार, जय कुमार समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि राहत राशि का समय पर भुगतान स्वागतयोग्य है, लेकिन वितरण सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंचल कार्यालय में आपदा राहत से जुड़े कई मामले अब भी लंबित हैं, जबकि इस प्रकरण में असामान्य रूप से त्वरित कार्रवाई की गई। इसे लेकर भी ग्रामीणों ने जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि राहत वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात बरता गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। मामले की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, आपदा प्रबंधन विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।वहीं, अंचलाधिकारी (सीओ) वीरेंद्र कुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को राहत राशि का चेक राजस्व पदाधिकारी (रेवेन्यू ऑफिसर) के माध्यम से विधिवत सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम के दौरान कोई अन्य व्यक्ति



चेक किसने सौंपा? आपदा राहत वितरण को लेकर प्रशासन घिरा





महगामा पंचायत के जतकुटिया गांव में वज्रपात से मृत किसान के परिजनों को आपदा राहत राशि का चेक वितरण विवादों में घिर गया है। चेक वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी मुंगेर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि आपदा राहत मद से स्वीकृत चार लाख रुपये की सहायता राशि का चेक लाभुक परिवार को संबंधित सरकारी अधिकारी के बजाय एक गैर-सरकारी व्यक्ति के माध्यम से दिलाया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। अजय कुमार, जय कुमार समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि राहत राशि का समय पर भुगतान स्वागतयोग्य है, लेकिन वितरण सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंचल कार्यालय में आपदा राहत से जुड़े कई मामले अब भी लंबित हैं, जबकि इस प्रकरण में असामान्य रूप से त्वरित कार्रवाई की गई। इसे लेकर भी ग्रामीणों ने जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि राहत वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात बरता गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। मामले की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, आपदा प्रबंधन विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।वहीं, अंचलाधिकारी (सीओ) वीरेंद्र कुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को राहत राशि का चेक राजस्व पदाधिकारी (रेवेन्यू ऑफिसर) के माध्यम से विधिवत सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम के दौरान कोई अन्य व्यक्ति मौजूद होकर फोटो खिंचवा लेता है, तो इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अब यह मामला प्रशासनिक जांच की मांग के साथ चर्चा का विषय बन गया है और ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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