आईटीसी मिशन सुनहरा कल और HPPI संस्था के संयुक्त तत्वावधान में मुंगेर में शिक्षको का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), पूरबसराय, मुंगेर में आईटीसी मिशन सुनहरा कल के अंतर्गत संस्था ह्यूमाना पीपल टू पीपल इंडिया संगठन के तहत, एससीईआरटी एवं शिक्षा विभाग बिहार के अनुबंध से प्रखंड सदर मुंगेर और जमालपुर में प्रथिमिक स्तर सुधार कार्यक्रम के तहत सभी शिक्षको का एक दिवसीय प्रशिक्षण (10 दिसंबर से 20 दिसंबर 2024) कार्यशाला का आयोजन किया।
प्राथमिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला मुंगेर के प्रखंड सदर मुंगेर और जमालपुर के कुल 653 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को प्राथमिक शिक्षा स्तर सुधार कार्यक्रम के प्रति जागरूक करना और बच्चों में बेहतर अधिगम सुनिश्चित करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) श्री विनय कुमार सुमन ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "हमें बच्चों की कक्षा-वार दक्षताओं को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए। इससे बच्चे समयानुसार वांछित योग्यता प्राप्त कर सकेंगे।"
प्रशिक्षण की मुख्य बातें:
कार्यशाला में आईटीसी की सुश्री अनीता , ITC कार्यक्रम कार्यकारी ने CSR प्रोजेक्ट और बच्चों की शिक्षा में सुधार हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। वहीं, HPPI के मास्टर ट्रेनर्स अश्वनी कुमार पांडे और भगवत दयाल ने शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण, अधिगम प्रतिफल, प्रिंट-रिच सामग्री (समृद्ध कक्षाएँ), स्मार्ट क्लासेस और थीमेटिक लर्निंग पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
HPPI टीम लीडर गजानन ने प्राथमिक शिक्षा सुधार कार्यक्रम के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए ग्रेट बुक और थीम बुक्स के प्रयोग की जानकारी दी।
समापन और निष्कर्ष:
कार्यशाला का समापन डायट प्रिंसिपल डॉ. पंकज कुमार के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने कहा, "प्रत्येक शिक्षक को प्रत्येक बच्चे के अधिगम प्रतिफल पर ध्यान देना चाहिए, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।"
इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर राजेश सैनी ने प्राथमिक स्तर सुधार कार्यक्रम मुंगेर के मुख्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए सभी शिक्षकों को धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला में सुशांत, प्रतिमा और एशबाई समेत अन्य एजुकेशन एक्सेलरेटर उपस्थित थे। इस आयोजन को शिक्षकों और बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।




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