रिपोर्टर मोहम्मद नजीर आलम
हमारे इस विशेष कार्यक्रम अभियान के प्रथम करी में आपका स्वागत हे
आइए आपको अवगत कराते हैं एक ऐसे सच से जो आपके ही इर्द गिर्द है मगर फिर भी आप इस सच्चाई से पूरी तरह से अवगत नहीं हैं इस मामले को समझ कर आप सोचने पर मजबूर जरूर होंगे....आप ने कोयला माफिया बालू माफिया भू माफिया तो खूब सुना होगा पर क्या-कभी स्वास्थ्य माफियाओं से वास्ता परा है आपका अगर हाँ तो आपको भी बेहतर अनुभव होगा और अगर नहीं तो तत्कालीन हमारे इस ख़बर पर और इस ख़बर के बाद आने वाली ख़बरों पर जरूर बने रहे.....आपको बता दे के रोटी कपड़ा और मकान के अलावे मानव के अनिवार्य जरूरतों में स्वास्थ्य भी सामिल हे जिसके लिए ग्रामीण इलाकों से आने वाले अधिकांश मरीज़ बेहतर से बेहतर सुविधाओं और इलाज के प्रयास में किसी न किसी तरह इन्हीं स्वास्थ्य माफियाओं का शिकार बन ही जाते है..और इन..स्वास्थ्य माफियाओं का रसूख और ताम-झाम इस तरह का होता है के आम लोग बेचारे इनके ख़िलाफ़ नहीं जाकर खुद का मुँह बंद रखने में ही भलाई समझते हैं इसी कारण कभी कभार ही कोई मामला उजागर हो पाता है .सुपौल जिले मे स्वास्थ्य महकमे के नाक के नीचे जगह जगह दर्जनों अवैध नर्सिग होम धरलले से चल रहे हैं और उनके दलाल भी पूर्णतः सक्रिय तो है ही साथ ही ऐसे स्वास्थ्य माफिया.खुद की हिफाजत और मरीजों और उनके परिजनों पर अपना प्रभाव बनाए रखने केलिए असमाजिक तत्वों को भी साथ रखते हे..कई जगहों पर तो एक ही डॉक्टर सहाब का बोर्ड भी टंगा मिल जाएगा..कई जगह बिना किसी डिग्री या निबंधन के बेघरक होकर मासूमों लोगों को इलाज के नाम पर लूट रहे है..ये हाल जिले के अधिकांस जगहों का है ब्लकि सुपौल जिला मुख्यालय और उसके आसपास ही अगर देखे तो आपको ऐसे दर्जनों निजी अस्पताल नर्सिग होम मिल जाएंगे. जंहा बिना किसी कुशल और उचित चिकित्सक के बरे से बरा ऑपरेशन तक कर दिया जाता है मरीजों को दिग्भ्रमित करने केलिए अस्पताल के बोर्ड पर चिकित्सकों की लंबी सूची भी मिल जायेगी .....
.ये धंधा.आज कल सबसे आसान तरीके से मोटी रकम कमाने का जरिया बन चुका हे थोड़े समय मे बहुत की लालसा में भोले भाले लोगों का शोषण किया जारहा..
...हमारी टीम ने इस मामले पर IMA के सचिव डॉक्टर अमन और जिले के सिविल सर्जन दोनों से जब बात की तो सुनिए क्या कुछ कहा उन्होंने.........
[यहां ima secretary डॉक्टर अमन का बाइट फिर सिविल सर्जन का बाइट लगाना हे]
तो सुना आपने सिविल सर्जन महोदय ने कहा के किसी भी अस्पताल या नर्सिग होम को चलाने से पहले कई प्रक्रिया को पूर्ण करना अनिवार्य है और कोई भी डॉक्टर एक या दो ही जगह अपना क्लिनिक रख सकते है मगर जमीन पर हकीकत कुछ और ही है ये सब को पता है मगर इसके रोकथाम केलिए पहल करने से अक्सर लोग कतराते हे ...यही कारण है के इन अवैध अस्पताल संचालकों का मनोबल चरम सीमा पर है...
फिलहाल हमारी इस अभियान के पहली किस्त में अभी केलिए इतना ही आगे हम बिस्तार से एक-एक कर हर पहलुओं से आपको अवगत कराने के साथ साथ स्वस्थ विभाग और जिला प्रशासन का भी इस ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश जारी रखेंगे ......
अभियान के लिए बिहार के सुपौल से ब्यूरो रिपोर्ट



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