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धरहरा उत्तर टोला स्थित लक्ष्मी मन्दिर के निकट जिर्णोद्धार नवनिर्मित शिव मंदिर में भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर निकाली गई भव्य कलश शोभा यात्रा

 



धरहरा उत्तर टोला स्थित लक्ष्मी मन्दिर के निकट जिर्णोद्धार नवनिर्मित शिव मंदिर में भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर निकाली गई भव्य कलश शोभा यात्रा जिसमे 51 कन्या एवं महिलाएं नए-नए परिधान पहन कर अपने माथे पर तिलक लगाकर कलश लेकर शिव भजन कीर्तन करते हुए काली मंदिर परिसर से बाजार होते हुए धरहरा गांव के रास्ते शिव मंदिर परिसर पहुंच कर समाप्त हुई इस मन्दिर निर्माण में धरहरा के ग्रामीणों का भरपूर सहयोग रहा,वही धरहरा प्रखंड के अंतर्गंत अमारी एवं अदलपुर में भी 101 कन्या एवं महिलाएं अपने शिर पर कलश लेकर नए परिधान में भगवान शिव भजन कीर्तन करते हुए काली स्थान से धरहरा बाजार होते हुए अमारी एबं अदलपुर पहुंच कर समाप्त हुई। इस मौके पर अमारी से राकेश कुमार,चौकीदार,सुरेश तांती, प्रीतम कुमार, उमेश तांती, दीपक कुमार, कुन्दन कुमार, सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजुद थे।



महाशिवरात्र‍ि हिंदुओं का एक धार्मिक त्योहार है, जिसे हिंदू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात शिव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्र‍ि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं।



महाशिवरात्र‍ि को लेकर भगवान शिव से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रम्हा के रूद्र रूप में मध्यरात्र‍ि को  भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव कर अपना तीसरा नेत्र खोला था, और ब्रम्हांड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। वैसे तो प्रत्येक माह में एक शिवरात्र‍ि होती है, परंतु फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली इस शिवरात्र‍ि का अत्यंत महत्व है, इसलिए इसे महाशिवरात्र‍ि कहा जाता है। वास्तव में महाशिवरात्र‍ि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानती है। ये दुर्लभ संयोग 300 वर्ष बाद देखने को मिलेगा ।


महाशिवरात्र‍ि के दिन शिव जी का विभिन्न पवित्र वस्तुओं से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है और बिल्वपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, बेर, उम्बी आदि  अर्पित किया जाता है। भगवान शिव को भांग बेहद प्रिय है अत: कई लोग उन्हें भांग भी चढ़ाते हैं। दिनभर उपवास रखकर पूजन करने के बाद शाम के समय फलाहार किया जाता है। 

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