7 वर्षीय गीतांक आयुष ने नेशनल कराटे चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक, सुपौल का बढ़ाया मान

 


7 वर्षीय गीतांक आयुष ने नेशनल कराटे चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक, सुपौल का बढ़ाया मान

रिपोर्टर: मोहम्मद नजीर आलम

सुपौल। जिले के रामनगर निवासी महज सात वर्षीय बालक गीतांक आयुष ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धि हासिल की है। तालकटोरा इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में 9 अगस्त को आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप-2026 में गीतांक आयुष ने अंडर-25 वेट कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे सुपौल जिले में खुशी का माहौल है।



गीतांक आयुष अजय कुमार के पुत्र हैं और रामनगर वार्ड नंबर-16, पीपरा, सुपौल के निवासी हैं। महज सात वर्ष की उम्र में उन्होंने कराटे के प्रति अपनी रुचि और लगातार अभ्यास के बल पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपनी पहचान बनाई।

प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबलों के बीच गीतांक आयुष ने आत्मविश्वास, अनुशासन और बेहतर तकनीक का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। उनकी इस सफलता को क्षेत्र के लोगों ने बड़ी उपलब्धि बताते हुए परिवार को बधाई दी है।



स्वर्ण पदक जीतकर घर लौटने पर गीतांक आयुष का लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें सम्मानित करते हुए उनकी सफलता पर गर्व व्यक्त किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और बच्चे मौजूद रहे।

परिजनों ने बताया कि गीतांक आयुष बचपन से ही खेल-कूद में रुचि रखते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह नियमित रूप से कराटे का अभ्यास करते हैं। परिवार का कहना है कि उनके प्रशिक्षकों और परिजनों के मार्गदर्शन से गीतांक ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

गीतांक की सफलता से गांव के अन्य बच्चों में भी खेल के प्रति उत्साह बढ़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि बच्चों को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

गीतांक आयुष की इस उपलब्धि ने यह साबित किया है कि सफलता के लिए बड़े शहरों की सुविधाएं ही जरूरी नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन के जरिए छोटे गांव-कस्बों से भी प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। उनकी सफलता पूरे सुपौल जिले के लिए गर्व और अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ