जर्जर विद्यालय पर लटका हादसे का साया, बारिश के बाद सोमवार से पठन-पाठन ठप
रिपोर्टर चन्दन कुमार।
जर्जर विद्यालय बना बच्चों के लिए जानलेवा, बारिश के बाद सोमवार से पठन-पाठन ठप
खपरैल टूटने से कमरों में भर रहा पानी, दीवारें ढहने की कगार पर; शिक्षक ग्रामीण के घर में दर्ज कर रहे उपस्थिति, अभिभावकों ने बच्चों को भेजना किया बंद
धरहरा (मुंगेर)। धरहरा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय लकड़कोला की जर्जर भवन व्यवस्था अब बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। लगातार हो रही बारिश के बाद विद्यालय की स्थिति इतनी खराब हो गई कि सोमवार से यहां पठन-पाठन पूरी तरह बंद हो गया है। ईंट और खपरैल से निर्मित पुराना भवन कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो चुका है। खपरैल टूट जाने के कारण बारिश का पानी सीधे कक्षाओं में गिर रहा है, जिससे कमरों में जलजमाव और कीचड़ फैल गया है। वहीं दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं और उनके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है।
विद्यालय के दोनों ओर आम रास्ता होने के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों पर भी हर समय हादसे का खतरा मंडरा रहा है। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए अभिभावकों ने अपने बच्चों को विद्यालय भेजना बंद कर दिया है। इससे कक्षा एक से पांच तक के सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
विद्यालय में पांच शिक्षक पदस्थापित हैं। विद्यालय की प्रभारी प्रियंका कुमारी ने बताया कि प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी अवकाश पर हैं। उन्होंने कहा कि भवन की स्थिति बेहद खतरनाक हो चुकी है। अभिभावकों ने सुरक्षा कारणों से बच्चों को विद्यालय भेजना बंद कर दिया है। इसकी सूचना संबंधित विभाग को भेज दी गई है। सभी शिक्षक प्रतिदिन विद्यालय पहुंचते हैं, लेकिन भवन में प्रवेश करना जोखिम भरा होने के कारण विद्यालय के समीप एक ग्रामीण के घर में बैठकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
भवन में पानी भर जाने के कारण मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना का संचालन भी पूरी तरह ठप हो गया है। इससे बच्चों को मिलने वाला पोषाहार भी बंद हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से विद्यालय भवन की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। लगातार बारिश के बाद स्थिति और भी भयावह हो गई है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन से तत्काल जर्जर भवन को उपयोग से बाहर घोषित कर नए विद्यालय भवन का निर्माण कराने अथवा वैकल्पिक सुरक्षित भवन में पठन-पाठन शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप है और मासूम बच्चों का भविष्य सरकारी व्यवस्था के भरोसे अधर में लटका हुआ है।

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