तिरंगे में लिपटकर घर लौटा बेटा, ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान की हत्या से गांव में मातम
30 मई को छुट्टी में घर आने वाला था धर्मेंद्र, उससे पहले पहुंचा शव; पत्नी-बच्चों के चीत्कार से दहला महमदा गांव
मुंगेर जिले के नया रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत महमदा गांव में उस वक्त मातम पसर गया, जब ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान धर्मेंद्र कुमार का शव उनके पैतृक गांव पहुंचा। गांव की गलियां चीख-पुकार और परिजनों के करुण क्रंदन से गूंज उठीं। जिस बेटे के 30 मई को छुट्टी लेकर घर लौटने की उम्मीद में परिवार दिन गिन रहा था, उसका शव तिरंगे में लिपटा घर पहुंचा तो हर आंख नम हो गई। पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
जानकारी के अनुसार धर्मेंद्र कुमार लैलख ममलखा आउटपोस्ट पर तैनात थे। बीती 25 मई की रात अज्ञात अपराधियों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर शव को नदी किनारे फेंक दिया। घटना की खबर मिलते ही पुलिस और आरपीएफ विभाग में हड़कंप मच गया। जवान की हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धर्मेंद्र कुमार अपने पीछे पत्नी रानी देवी और दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा हर्ष 18 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा राज मात्र 12 वर्ष का है। पिता की मौत की खबर सुनते ही दोनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव पहुंचते ही शव को देखकर पत्नी बेसुध हो गईं। ग्रामीणों की आंखें भी नम हो उठीं और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध नजर आया।
मृतक की पत्नी रानी देवी ने आरपीएफ विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब धर्मेंद्र ड्यूटी पर थे और संपर्क नहीं हो पा रहा था, तब विभाग ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते खोजबीन की जाती, तो शायद धर्मेंद्र की जान बच सकती थी। मृतक के मित्र सुरेश कुमार ने भी प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
इधर, आरपीएफ जमालपुर के सहायक सुरक्षा आयुक्त हीरा प्रसाद सिंह ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस व आरपीएफ की संयुक्त टीम जांच में जुटी हुई है। एसपी द्वारा अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही हत्यारों की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
धर्मेंद्र कुमार की हत्या ने न सिर्फ उनके परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोगों ने सरकार और प्रशासन से दोषियों को कड़ी सजा दिलाने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता देने की मांग की है।


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