धरहरा दक्षिणी पंचायत के सरपंच सह सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष राकेश रंजन उर्फ काली चरण सिंह के द्वारा निकाली गई ढाई सौ फीट की लंबी तिरंगा यात्रा जिसको जिला परिषद सदस्य इंदुमती देवी एवं धरहरा दक्षिणी पंचायत के मुखिया मनोहर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, तिरंगा यात्रा ग्राम कचहरी परिसर से शहिद राजीव नन्दन सिंह सीआरपीएफ के स्मारक पर माल्या अर्पण कर बाजार इस्थित भोला बाबा मन्दिर से वापस लौटा सरपंच राकेश रंजन उर्फ कालीचरण सिंह ने सहिद अनिल सिंह मुखिया के स्मारक पर भी माल्या अर्पण कर ग्राम कचहरी कार्यालय के प्रांगण में तिरंगे झंडे को दी सलामी ७५ वॉ गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राकेश रंजन ने कहा मैं आज उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन कर श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दिया। साथ डॉक्टर बीआर अंबेडकर समेत उन सभी विद्वान लोगों को भी कोटि- कोटि नमन
जिन्होंने हमें ऐसा महान संविधान दिया। यह संविधान ही है, जो भारत के सभी जाति और वर्ग के लोगों को एक दूसरे से जोड़े रखता है। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। २ साल, ११ महीने और १८ दिन में यह तैयार हुआ था। सन १९५० से आज तक संविधान को लागू करने के लिए २६ जनवरी का दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि १९३० में इसी दिन कांग्रेस के अधिवेशन में भारत को पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई थी। बल्कि सांस्कृति विविधता में एकता को भी प्रदर्शित करती है जो हमारी विरासत का प्रतीक है। बहुत कुछ कर दिखाया है। सबसे बड़ी बात कि हमने अपने होने को साबित किया है। अपनी बहुरंगी-बहुभाषी, सतरंगी-साझी संस्कृति की धार को न सिर्फ कायम रखा है, उसे और गहरे अर्थ दिए हैं। विकास के नए-नए सोपान चढ़े हैं। यही वजह है कि दुनिया हमारी और उम्मीद से देख रही है। यह भी सच है कि आजादी मिलने और संविधान लागू होने के इतने बरसों बाद भी आज भारत अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा,नक्सलवाद, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, लिंग भेद, अशिक्षा जैसी समस्याओं से लड़ रहा है।
हम सभी को एक होकर इन समस्याओं को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। भारत को जब तक इस समस्याओं से बाहर नहीं निकालते तब तक स्वतंत्रता सेनानियों का सपना पूरा नहीं होगा। आज हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा मानव संसाधन है, इसलिए अगर हमसब देशवासी एक होकर इन समस्याओं से लड़े तो भारत बहुतजल्द विकसित देशों की गिनती में गिना जाएगा। राष्ट्रपति भव्य समारोह में तिरंगा झंडा फहराते हैं। राष्ट्र्गान और ध्वजा रोहण के साथ उन्हें २१ तोपों की सलामी दी जाती है।अशोक चक्र और कीर्ति चक्र जैसे महत्वपूर्ण सम्मान दिए जाते हैं। राजपथ पर निकलने वाली झांकियों में भारत की विविधतामें एकता की झलक दिखती है। परेड में भारत की तीनों सेना-नौ सेना, थल सेना और वायु सेना की टुकड़ी शामिल होती हैं।और सेना की ताकत दिखती है। ऐसा नहीं है कि २६ जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा झंडा फहराने और परेड व झांकियों आदि के समापन के साथ ही यह राष्ट्रीय त्योहार खत्म हो जाता है। 29जनवरी को बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी के साथ गणतंत्र दिवस उत्सव का समापन होता है। मेरे प्यारे साथियों, गणतंत्र दिवस सिर्फ जश्न का नहीं बल्कि प्रगति का जायजा लेने और उभरती चुनौतियों की तरफ भी देखने का दिन है। २६ जनवरी १९५० के दिन हमरा संविधान लागू किया गया था आकलन करना चाहिए क्या खोया और क्या पाया। आजादी के बाद हमने बहुत लंबा सफर तय कर लिया जयहिंद जय भारत। इस मौके पर हजारों की संख्या में ग्रामीण सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे



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