अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र बंगलवा भगवान भरोसे, डॉक्टर-जीएनएम नदारद, मरीज घंटों रहे परेशान




अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र बंगलवा भगवान भरोसे, डॉक्टर-जीएनएम नदारद, मरीज घंटों रहे परेशान


मुंगेर जिला अंतर्गत धरहरा प्रखण्ड अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंगलवा उप स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था बुधवार को पूरी तरह भगवान भरोसे दिखी। दोपहर 12 बजे तक केंद्र पर न तो डॉक्टर पहुंचे थे और न ही जीएनएम। केंद्र पर सिर्फ गार्ड और डाटा एंट्री ऑपरेटर ही मौजूद मिले। इस दौरान इलाज के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन घंटों डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।



प्राप्त जानकारी के अनुसार उप स्वास्थ्य केंद्र बंगलवा में बुद्धवार को डॉक्टर धीरज कुमार राहुल, एवं जीएनएम निरुपा रंजन की ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन दोपहर 12 बजे तक दोनों में से कोई भी अपने कर्तव्य स्थल पर नहीं पहुंचा था। वहीं दूसरी एएनएम ममता कुमारी और सरस्वती कुमारी फील्ड में टीकाकरण कार्य के लिए आंगनबाड़ी केंद्र पर गई हुई थीं।



इस कारण स्वास्थ्य केंद्र पर ताला तो नहीं लगा था, लेकिन डॉक्टर के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी रहीं। मौके पर मौजूद गार्ड और डाटा एंट्री ऑपरेटर मरीजों को सिर्फ आश्वासन देते नजर आए।


केंद्र पर सुबह से इंतजार कर रहे मरीजों में खोपावर गांव निवासी ममता देवी पति गणेश कोर, खोपा गांव की भतनी देवी पति केशव कोर, मक्कू पासवान पिता स्वर्गीय डुबान पासवान सहित दर्जनों मरीज शामिल थे। मरीजों का कहना था कि वे सुबह 9 बजे से ही केंद्र पर आए हुए हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से उन्हें बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र में अक्सर यही स्थिति बनी रहती है।



वही इस संबंध में जब प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर अविनाश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आज बंगलवा उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर धीरज कुमार राहुल एवं जीएनएम निरुपा रंजन की ड्यूटी लगाई गई थी। बिना किसी सूचना के डॉक्टर एवं जीएनएम अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए हैं। सभी से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। स्पष्टीकरण आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं सिविल सर्जन से मांग की है कि बंगलवा जैसे ग्रामीण क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि गरीब और असहाय मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।

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