दोनों पैरों से दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता आमिर ऊल इस्लाम कड़ाके के शीतलहर सर्दी में गरीब असहाय जरुरतमंदों के लिए बने फरिश्ता
दोनों पैरों से दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता आमिर ऊल इस्लाम कड़ाके के शीतलहर सर्दी में गरीब असहाय जरुरतमंदों के लिए बने फरिश्ता
*सर्दी में फुटपाथ पर घूम-घूम कर कोई कंबल से वंचित ना हो इसके लिए अद्भुत कार्य कर रहे हैं आमिर रात 2:00 बजे तक अस्पताल से लेकर झुकी झोपड़ी और घर घर वैसे लोगों को चिन्हित कर अपने साथियों को बुद्धिजीवी को प्रेरित कर कंबल गर्म कपड़े सिर्फ भोजन एकत्रित कर हैरतअंगेज कार्य कर बड़े-बड़े नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी शर्मिंदा कर दिया है दोनों पैरों के दिव्यांग आमिर ऊल इस्लाम ने*
*इस कार्य मे उनकी धर्मपत्नी रुखसार फातिमा का सहयोग मिलता है जो बच्चों को पढ़ाने और रोजाना रात्री जरूरतमंदों के लिये भोजन के साथ आमिर ऊल इस्लाम का पूरा पूरा साथ देती हैं*
*पिछले 15 सालों से दोनों पैरों से दिव्यांग शहर मुंगेर के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना धूप बारिश सर्दी जरूरतमंद बेबस लाचार लोगों के लिए लगा रहता है*
*जैसे रात को खाना खिलाना गरीब बेटी की शादी में सहयोग मरीज को इलाज में सहयोग रक्तदान बेरोजगारों को उनके योग्यता अनुसार दुकान में स्कूल में ड्राइवर के रूप में सेल्समेन इत्यादियों में हजारों लोगों को रोजगार दिलाने का कार्य कर एक कीर्तिमान स्थापित अपने आप में कर चुके हैं*
*पिता भाई बहन के निधन के बाद भी नहीं टूटा आमिर*
*10 सालों से माँ बिस्तर पर है कयी परेशानी के बावजूद भी समाज साकार प्रशासन के नकारात्मक रवैया के बाद भी नही बीखरा दोनों पैर से दिव्यांग आमिर ऊल इस्लाम*
*उन्होंने बेहतर समाज निर्माण के लिए लोकतंत्र में एक संदेश देने हेतु महापौर चुनाव भी लडा जहां बड़े-बड़े सुरमा करोड़ रूपया खर्च किए वही यह दिव्यांग खुद का प्रचार खुद से बेहतर समाज के लिए आंखों में आंसू लिए भीख मांगता रहा लेकिन हमारे समाज को शायद अच्छे लोगों की जरूरत नहीं और यहां तक के अमीर उल इस्लाम ने जिन लोगों को सहयोग किया उन लोगों की भी उनके खिलाफ मत गया*
*सांसद विधायक प्रशासन बड़े-बड़े पूंजीपति तक आमिर को जानते हैं लेकिन इस दिव्यांग के प्रति समाज का नकारात्मक रवैया समझ से पड़े हैं अभी हाल में ही मुंगेर मंच ने सैकड़ो लोगों को उत्कृष्ट कार्यो के लिए सम्मानित किया लेकिन आमिर ऊल इस्लाम का नाम नहीं था*
*जब किसी ने पूछा तो आमिर ने कहा किसी के काम आना किसी को खाना खिलाना किसी का दर्द एवं दुख बांटना ही मेरे लिए असली सम्मान है मैं और मेरा अल्लाह जानता है मैं काम अंतिम सांस तक करते रहूंगा शायद मेरे काम का एहसास दशरथ मांझी के नहीं रहने के बाद लोग याद करते हैं वैसे ही याद किया जाएगा*

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